देवास में शराब तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी को ट्रक से कुचला, मौत; जांच में सामने आया अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क
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Sundar Singh Hada , सरदारपुर, धार
208 पेटी और 1,800 लीटर से अधिक अवैध शराब बरामद होने की खबर; गुप्त चैंबर बनाकर गुजरात भेजी जा रही थी खेप, पुलिस जांच में सात लोगों की भूमिका सामने आई, चालक सहित चार आरोपी गिरफ्तार
देवास/खातेगांव, मध्य प्रदेश।
मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और तस्करी का एक गंभीर मामला सामने आया है। देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब परिवहन की सूचना पर कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम के थाना प्रभारी दिलीप पुरी को शराब से भरे आयशर ट्रक ने कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल थाना प्रभारी को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के लगभग दो घंटे तक प्रयास करने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात लगभग 1:30 बजे इंदौर-बैतूल हाईवे पर संदलपुर फाटा के समीप हुई।
इस घटना ने न केवल पुलिस और प्रशासन को झकझोर दिया, बल्कि मध्य प्रदेश से गुजरात तक फैले कथित अवैध शराब तस्करी नेटवर्क की परतें भी खोल दी हैं। जांच में सामने आया कि शराब को सामान्य ट्रक में नहीं, बल्कि विशेष रूप से तैयार किए गए गुप्त चैंबरों में छिपाकर ले जाया जा रहा था। पुलिस ने वाहन से 208 पेटी तथा 1,800 लीटर से अधिक शराब बरामद होने की जानकारी दी है।
1. मुखबिर की सूचना पर बनाई गईं पुलिस की टीमें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में अवैध शराब गुजरात की ओर भेजी जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चार विशेष टीमें गठित कर अलग-अलग स्थानों पर निगरानी और नाकाबंदी की व्यवस्था की गई थी।
इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस को इंदौर-बैतूल हाईवे पर खातेगांव क्षेत्र के संदलपुर फाटा स्थित नर्मदा ढाबे के पास संदिग्ध आयशर ट्रक खड़ा दिखाई दिया। वाहन का नंबर MP-43-H-4786 बताया गया है।
खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने वाहन चालक से नीचे उतरकर जांच में सहयोग करने को कहा, लेकिन आरोप है कि चालक ने वाहन रोकने के बजाय अचानक ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी।
2. 500 मीटर दूर थे टीआई, कांग्रेस कॉल पर भी कही थी रोकने की बात
समाचार रिपोर्ट में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, कार्रवाई से पहले टीआई दिलीप पुरी अपने सहयोगियों के साथ संदिग्ध वाहन की तरफ बढ़ रहे थे। बताया गया कि वे घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर थे और इस दौरान उन्होंने फोन पर भी वाहन को रोकने की बात कही थी।
पुलिस की नाकाबंदी के दौरान संदिग्ध ट्रक सड़क किनारे खड़ा दिखाई दिया। मौके पर पहुंचने के बाद जब चालक से पूछताछ और तलाशी की कोशिश की गई, तब उसने कथित तौर पर तेज गति से वाहन आगे बढ़ा दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक चालक ने डिवाइडर पर वाहन चढ़ाते हुए यू-टर्न लेने का प्रयास किया। इसी दौरान थाना प्रभारी दिलीप पुरी ट्रक के पिछले पहिए की चपेट में आ गए। घटना में आरक्षक सोहन जाट भी घायल हुए।
यह घटना इस बात की गंभीरता को उजागर करती है कि संगठित अवैध कारोबार में शामिल लोगों द्वारा कार्रवाई रोकने के लिए किस हद तक हिंसक तरीका अपनाया जा सकता है। हालांकि, चालक की मंशा और घटनाक्रम की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से होगी।
3. अस्पताल में दो घंटे तक चला उपचार, लेकिन नहीं बच सकी जान
ट्रक की चपेट में आने से थाना प्रभारी दिलीप पुरी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए लगभग दो घंटे तक प्रयास किए, लेकिन अत्यधिक गंभीर चोटों के कारण उनका निधन हो गया।
इस घटना में आरक्षक सोहन जाट भी घायल हुए। उनके उपचार की जानकारी सामने आई थी।
दिलीप पुरी के निधन की खबर से पुलिस विभाग, प्रशासन और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। उन्होंने ड्यूटी के दौरान अवैध शराब परिवहन को रोकने के प्रयास में अपनी जान गंवाई।
4. ट्रक में बना था विशेष गुप्त चैंबर, सामान्य नजर से पहचानना मुश्किल
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ट्रक की बनावट और उसमें शराब छिपाने का तरीका है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि आयशर ट्रक में विशेष रूप से गुप्त चैंबर तैयार किया गया था। बाहर से देखने पर वाहन सामान्य मालवाहक ट्रक जैसा दिखाई देता था, लेकिन उसके अंदर शराब की पेटियां छिपाने के लिए अलग जगह बनाई गई थी।
वाहन के पिछले हिस्से को खोलने पर अंदर छिपाकर रखी गई शराब की पेटियां मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक में 208 पेटियां शराब बरामद हुईं और कुल मात्रा 1,800 लीटर से अधिक बताई गई है।
इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या शराब तस्करी में इस्तेमाल होने वाले ऐसे संशोधित वाहनों की अन्य राज्यों और जिलों में भी आवाजाही हो रही है तथा इनकी पहचान के लिए परिवहन और आबकारी विभाग के पास पर्याप्त निगरानी व्यवस्था है या नहीं।
5. गुजरात में शराबबंदी, मध्य प्रदेश से भेजी जा रही थी खेप
जांच में सामने आया कि कथित तस्करी नेटवर्क का उद्देश्य मध्य प्रदेश से शराब गुजरात पहुंचाना था। गुजरात में वर्ष 1960 से शराबबंदी लागू है। ऐसे में वहां शराब की अवैध आपूर्ति करने के लिए मध्य प्रदेश के लाइसेंसी शराब कारोबार से शराब जुटाकर अलग-अलग माध्यमों से पहुंचाने का आरोप सामने आया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, शराब की खरीद, परिवहन, वाहन की व्यवस्था, रास्ते की निगरानी और गुजरात तक खेप पहुंचाने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका थी।
इस नेटवर्क में कथित तौर पर लाइसेंसी शराब दुकानों से शराब जुटाने, ट्रकों में छिपाकर ले जाने और रास्ते में पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की जाती थी।
6. किराए के ट्रक से तस्करी, कार से पायलटिंग का भी आरोप
जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। कथित तस्करी नेटवर्क में केवल ट्रक का उपयोग नहीं किया जाता था, बल्कि रास्ते की निगरानी और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए कार से पायलटिंग किए जाने की बात भी सामने आई है।
इस व्यवस्था में आगे चलने वाला वाहन रास्ते में पुलिस की नाकाबंदी, चेकिंग और अन्य बाधाओं की जानकारी पीछे चल रहे ट्रक तक पहुंचाने में मदद कर सकता था।
पुलिस की जांच के अनुसार, विशेष रूप से तैयार किए गए ट्रकों में शराब छिपाकर ले जाई जाती थी और अलग-अलग जिलों के रास्तों से होते हुए गुजरात की ओर खेप भेजी जाती थी।
यदि जांच में यह व्यवस्था प्रमाणित होती है, तो यह मामला केवल एक ट्रक में अवैध शराब मिलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठित अंतरराज्यीय तस्करी और उसके पूरे नेटवर्क की जांच का विषय बन जाएगा।
7. राहुल जायसवाल का नाम आया सामने, कथित नेटवर्क के संचालन का आरोप
जांच में हरदा जिले के राहुल जायसवाल का नाम कथित नेटवर्क के प्रमुख संचालक के रूप में सामने आया है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस का आरोप है कि वह शराब की खेप के परिवहन, नेटवर्क के संचालन और अवैध कारोबार से प्राप्त रकम के बंटवारे का काम संभालता था।
बताया गया कि राहुल जायसवाल रविवार को कांग्रेस की रैली में शामिल होने के लिए दिल्ली गया हुआ था। वापस लौटने पर पुलिस ने उसे इंदौर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, राहुल जायसवाल का नाम खातेगांव विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के पदाधिकारी के रूप में भी सामने आया है। इस मामले में उसका राजनीतिक परिचय भी चर्चा में आया है, लेकिन किसी राजनीतिक दल या संगठन की सामूहिक संलिप्तता का निष्कर्ष केवल किसी व्यक्ति के पद के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
राहुल जायसवाल ने गिरफ्तारी से पहले सोशल मीडिया पर शराब कारोबार में हिस्सेदारी से इनकार करते हुए अपने पेट्रोल पंप और निजी बसों के कारोबार का उल्लेख किया था। पुलिस के आरोपों और उसके पक्ष का अंतिम निर्धारण जांच तथा अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों से होगा।
8. सात लोगों की भूमिका जांच के दायरे में, चार गिरफ्तार
4 नवंबर को प्रकाशित जांच संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस कथित नेटवर्क में सात लोगों की भूमिका सामने आने की जानकारी दी थी। इनमें गुजरात से जुड़े कारोबारी और हरदा के कांग्रेस नेता का नाम भी शामिल बताया गया।
पुलिस की ओर से सामने आए विवरण के अनुसार:
- गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत: आलीराजपुर निवासी ट्रक चालक, जिस पर थाना प्रभारी को ट्रक से कुचलने का आरोप है। बाद की रिपोर्ट के अनुसार उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
- केरम सिंह: आलीराजपुर निवासी, जिस पर ट्रक उपलब्ध कराने और परिवहन व्यवस्था में भूमिका निभाने का आरोप है। उसे गिरफ्तार किया गया।
- राहुल जायसवाल: कथित नेटवर्क का प्रमुख संचालक और रकम के लेनदेन तथा वितरण से जुड़ी भूमिका का आरोपी। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई।
- विजय राव: इंदौर निवासी कर्मचारी, जिस पर नेटवर्क में काम करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार उसने इस संबंध में पूछताछ के दौरान जानकारी दी।
- मनीष जायसवाल: कथित साझेदार के रूप में नाम सामने आया, जिसकी तलाश की जानकारी रिपोर्ट में दी गई।
- मोहिन जायसवाल: गुजरात से जुड़े कथित साझेदार के रूप में नाम सामने आया।
- पटेंद्र जायसवाल: शराब दुकानों से जुड़े कारोबारी के रूप में जांच में नाम सामने आया।
इनमें से सभी व्यक्तियों की भूमिका और जिम्मेदारी अभी जांच का विषय है। किसी भी आरोपी को दोषी घोषित करना न्यायालय का अधिकार है।
9. हरदा की शराब दुकानों से जुड़ रहे तार, बैच नंबर से जांच
इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू हरदा जिले की लाइसेंसी शराब दुकानों से बरामद शराब का संबंध है।
जांच के दौरान ट्रक के गुप्त चैंबर से मिली शराब के ब्रांड और बैच नंबर का मिलान दुकानों को जारी किए गए स्टॉक से किए जाने की जानकारी सामने आई।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, शराब का स्टॉक लाइसेंसी दुकानों को जारी किया गया था, लेकिन उसे आबकारी विभाग की अनुमति के बिना दूसरे स्थान पर भेजे जाने की आशंका सामने आई।
हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र की शराब दुकानों के लाइसेंस पर भी प्रशासन ने कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, हरदा रोड टिमरनी और सोंडलपुर रोड टिमरनी की दो शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है कि लाइसेंस के तहत खरीदा गया स्टॉक किसके नियंत्रण में था, किस स्थान पर भेजा गया, परिवहन की अनुमति किसके पास थी और विभागीय रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति क्या दर्ज थी।
10. आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
अवैध शराब परिवहन के मामले में केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं हुई, बल्कि आबकारी विभाग की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आई।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, हरदा के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमर सिंह बघेल तथा आबकारी आरक्षक अरुण कुमरे और कृष्णपाल सिंह डोडियार को निलंबित किया गया। उन्हें आगामी आदेश तक भोपाल मुख्यालय के फ्लाइंग स्क्वॉड से संबद्ध किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
यह कार्रवाई विभागीय लापरवाही और शराब के स्टॉक की निगरानी से जुड़े सवालों के बीच की गई।
अब जांच का महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि शराब दुकानों से निकले स्टॉक की निगरानी किस स्तर पर हो रही थी, परिवहन की अनुमति किसने दी और अवैध रूप से शराब दूसरे स्थान पर पहुंचाने की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची।
11. विशेष डीजी उपेंद्र जैन को जांच की जिम्मेदारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जांच में लगाया गया। विशेष पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन को जांच के लिए मौके पर भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
इसके अतिरिक्त एडीजी राकेश गुप्ता और डीआईजी नवनीत भसीन के भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की जानकारी सामने आई।
पुलिस की जांच का दायरा अब केवल ट्रक चालक तक सीमित नहीं है। इसमें शराब के स्रोत, दुकानों से स्टॉक निकलने, वाहन की व्यवस्था, कथित साझेदारों, परिवहन मार्ग, पायलटिंग और गुजरात में खेप पहुंचाने वाले लोगों की पहचान शामिल है।
12. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की एक करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा
थाना प्रभारी दिलीप पुरी के निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत अधिकारी के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत उपनिरीक्षक (एसआई) पद पर नियुक्त करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री की ओर से पुलिस और प्रशासन को अवैध शराब के परिवहन, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ प्रदेशव्यापी सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई।
यह घोषणा ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारी के परिवार को आर्थिक और रोजगार संबंधी सहायता देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
13. गृह ग्राम बरमंडल में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर सोमवार शाम उनके गृह ग्राम बरमंडल पहुंचा। गांव में शोक का माहौल रहा। रिपोर्ट के अनुसार, गांव में दुकानें बंद रहीं और ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान परिवार, ग्रामीणों और पुलिस विभाग से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। उनकी पत्नी कविता और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए यह अत्यंत दुखद क्षण था।
ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अधिकारी के प्रति क्षेत्र में गहरी संवेदना व्यक्त की गई।
14. इस घटना ने उठाए कई बड़े सवाल
यह घटना केवल एक पुलिस अधिकारी की मौत या एक ट्रक से शराब बरामद होने तक सीमित नहीं है। इससे कई गंभीर सवाल सामने आते हैं:
1. मध्य प्रदेश के लाइसेंसी शराब दुकानों से शराब दूसरे राज्य में कैसे पहुंच रही थी?
2. क्या शराब की तस्करी लंबे समय से संगठित तरीके से की जा रही थी?
3. गुप्त चैंबर वाले वाहनों की जांच और पहचान के लिए क्या व्यवस्था थी?
4. क्या अन्य जिलों में भी ऐसे वाहनों से शराब की तस्करी हो रही है?
5. शराब की खेप की पायलटिंग करने वाले वाहनों और उनके संचालकों की पहचान हुई है या नहीं?
6. शराब दुकानों से जारी स्टॉक का हिसाब और वास्तविक बिक्री का मिलान किस प्रकार किया जाता है?
7. क्या संबंधित विभागों के बीच निगरानी और सूचना साझा करने की व्यवस्था पर्याप्त थी?
8. गुजरात तक शराब पहुंचाने वाले अंतिम खरीदारों और वितरणकर्ताओं की पहचान कब तक होगी?
9. इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की भी जांच होगी या नहीं?
10. ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए रात्रिकालीन चेकिंग में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे या नहीं?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
15. अवैध शराब तस्करी के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जरूरत
मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच शराब की अवैध आवाजाही का यह मामला सीमावर्ती जिलों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। हरदा, देवास, आलीराजपुर और अन्य जिलों के रास्तों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय को मजबूत करना आवश्यक हो जाता है।
सिर्फ वाहन पकड़ने से इस तरह के कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती। शराब का स्रोत, खरीददार, परिवहनकर्ता, वाहन मालिक, रास्ते में मदद करने वाले लोग, आर्थिक लेनदेन और अंतिम वितरण केंद्रों तक जांच पहुंचाना जरूरी है।
इसके साथ ही लाइसेंसी शराब दुकानों के स्टॉक का डिजिटल रिकॉर्ड, बैच नंबर की निगरानी, परिवहन अनुमति की जांच और संदिग्ध वाहनों की नियमित चेकिंग को प्रभावी बनाना भी आवश्यक है।
आज का युग का सवाल: जब लाइसेंसी दुकानों से निकली शराब गुप्त चैंबर वाले ट्रकों के माध्यम से दूसरे राज्य तक पहुंचने के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इस पूरी व्यवस्था की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? एक पुलिस अधिकारी की जान जाने के बाद कार्रवाई शुरू होना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों की पहचान हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
आज का युग न्यूज़ चैनल की ओर से दिवंगत थाना प्रभारी दिलीप पुरी को विनम्र श्रद्धांजलि तथा शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना।
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